पुरानी होके और भी अज़ाब होती जा रही है
मोहब्बत बेशरम, बेहिसाब....
होती जा रही है....!
पुरानी होके और भी अज़ाब होती जा रही है
मोहब्बत बेशरम, बेहिसाब....
होती जा रही है....!
"I said you need to strive to be better than everyone else. I didn't say you needed to be better than everyone else. But you gotta try. That's what character is: It's in the try."
Friday Night lights : Book, movie and a tv series too.
मौत की हिम्मत कहां थी मुझसे टकराने की, कमबख्त ने मोहब्बत को मेरी सुपारी दे डाली।
Monsoon special
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Khud ko kar Buland itna ki Khuda apne bande se puchhe "Beta chad to gaye ho, ab bataa . . .utroge Kaise ???" :joy: :D
😂😂
Single huye itne din ho gaye, ki man kar raha hai ghar k bahar Notice Board lagwa du "Girlfriend chahiye: Jinda ya Murda" :p
अगर आँसुओं का कोई रंग होता, तो ये तकिये मेरे दर्द की कहानी साफ बयां करते....।
Ab Maine v kalam rakhna sikh liya hai doston.... Jis din v koi kahega ki hum tumhare hai, Dastakhat hi karwa lunga.
Deadly PJ
ऐसे ही झील किनारे टहल रहे थे, वो फूटपाथ पे खड़ी फोन पर बतिया रही थी और हम तीन फ़ीट ऊंचे चबूतरे पर खड़े होकर, उसे नज़र बचा-बचा के नयनपान कर रहे थे। लेकिन ज़्यादा देर तक ऐसे ही उसे देखते रहते तो क्या सोचती, इसलिए उससे कैमरा लेने के लिए अपना हाथ बढ़ा दिए उसकी तरफ, लेकिन वो पता नहीं किस दुनिया में मगन थी, उसे लगा हम चबूतरे पर चढ़ने के लिए उसे हाथ दे रहे और सीधा हाथ पकड़ लिया हमारा! कसम महादेव की जो करंट लगा है एकदम झन्न हो गए, अब न हाथ छोड़ते बने, न ठीक से पकड़ते बने। और मैडम तो फोन पे पता नहीं कितनी मगन थी, ये भी नही दिख रहा था कि हमारा हाथ-पैर काँप रहा है!
लेकिन हम भी फिर भगवान का नाम लिए और खींच के ऊपर चढ़ा लिए। एक झटके में जो ऊपर आई है वो, बस बीता भर का फासला रह गया था, हममे और उसमें। ऐसा लग रहा था मानो पंडित ने दस की दक्षिणा चढाने को कही थी और यजमान ने हज़ार का नोट रख दिया हो। बस यही वो क्षण था, जब लगने लगा कि ये शेक्सपीयर से लेकर जितने भी लोगों ने प्रेम की व्याख्या की है, ऐसे ही नहीं की है, कुछ तो ससुर रहा ही होगा। खामोश चहलकदमी और इक्की-दुक्की बातें, खामोश झील, वो, मैं और इन सब के बीच 'हम' को तलाशते हम दोनों।
अब उसे घर छोड़ना था, मन तो नहीं था, लेकिन ये ज़िद करने वाला टाइम अभी नहीं आया था, अभी तो बस थोड़े से लिहाज़ और ज़रा सा संकोच। उसका घर आ गया, टाटा किये, ज़रा सा मुस्कुराये और गाड़ी घुमाके चल दिए। रस्ते भर पूरी सड़क पर ये लेटा-लेटा के मोटरसाइकिल चला रहे थे। घर पहुँचे, तत्काल मेसेज किये। और उधर से सुनने को मिला कि जाते समय एक बार पलट के देखना बहुत ज़रूरी होता है। समंदर में बाढ़ आती है क्या? अगर न भी आती हो तो इस वक़्त पंडित का चेहरा देख के अनुमान तो लगाया ही जा सकता था। एकदम फील आ गया था लौंडे को! और फिर सारी रात whatsapp पे मन में उठ रही तमाम हिलोरों को शब्दों के डिब्बे में भर-भर कर एक दूसरे को भेज रहे थे और लपक रहे थे।
बस ये समझ लो whatsapp पर रात भर होने वाली चैट किसी सरकारी नौकरी के अपॉइंटमेंट लैटर से कम नहीं होती, एक बार हरः लगी, तो बात पक्की! ऐसा ही कुछ हुआ था उस रोज़। मोमोज़, चाय और जाने क्या-क्या, अब बात खाने पीने से काफी ऊपर आ चुकी थी। अब साँसों और धड़कनों का पूरा रेला सिर्फ उनके whatsapp पर online और typing... वाली हरकतों पर ही फोकस कर रहा था।
ऐसे तो ये एक आम whatsapp चैट ही थी लेकिन एक बहुत खास इंसान और वजह ने इसे किसी जुए जैसा बना दिया था, जिसपे दाँव पर मेरा दिल लगा था, और चाल चली जा रही थी छोटे-छोटे मैसेजों और स्माइलियों से। मज़े की बात तो ये थी कि दाँव पे लगी चीज़ पहले ही हार चुके थे, इसलिए खोने को कुछ बाकी न था। लेकिन इन सब लंबी-चौड़ी बातों से कुछ नहीं होता। सच तो ये है कि उस वक़्त एक-एक बात ऐसे फेंक रहे थे उसके सामने जैसे मोहल्ले का छोटू बॉलिंग कराने से पहले गेंद चूम कर उसमें मंतर फूंकता है।
इधर रात बीतने से पहले दिल में एक नयी सुबह हो चुकी थी, मन का सूरज शांत और लाल था, हलकी सी हवा बिना किसी चिंता के आजू-बाजू टहल रही थी। न उसने कुछ कहा, न मैंने कुछ कहा। पर हम दोनों को ही आभास था। और हमारे शब्दों के बयालों से झाँक रही हमारी मुस्कुराहट अपनी रज़ामंदी दे रही थी। पंडित खुश था।
"कहते हैं.." कहकर लोग जाने क्या-क्या अंट-शंट बताते रहते हैं। अबे बात-बताएँ साफ़, ये प्रेम है, अपने आप होगा और इतना ज़बरदस्त होगा, कि हवा और पानी से ज़्यादा ज़रूरी लगेगा। हाँ चौंको नहीं, ये भी टाइम आता है। चोक लेती है, गला सूखता है, सब होता है। लेकिन जब प्रेम होता है, तो मुकम्मल होता ही जाता है!
😁😂😂
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