COPIED* स्टेशन_मास्टर से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी :- ================================== मित्रों, इस समूह में सारे सदस्य रेलवे में जाने को इक्क्षुक हैं. और उनके मस्तिष्क में ये प्रश्न बार बार कौन्धता होगा की NTPC 2015 में शामिल विभिन्न पदों के कर्तव्य, जिम्मेदारीयाँ, सुविधायेँ, कठिनाईयाँ इत्यादि क्या और कैसे हैं. मैं "कृष्ण कुमार" अपनी क्षमता -समझ और अनुभव के आधार पर इस संबंध में आपको कुछ महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करना चाहता हूँ. #कौन हैं स्टेशन मास्टर ? > भारतीय रेलवे का सबसे महत्वपूर्ण कर्मचारी जो बहुप्रशिक्षित,अत्यन्त समझदार, तीव्र बुद्धि वाला व्यक्ति होता हैं. सामान्यत: बहुआयामी कार्यों को अंजाम देने वाला और विपरीत परिस्थितियों में बिल्कुल सटीक निर्णय लेनेवाला महामानव हैं . #कैसे चयन होता हैं ? इसका चयन RRB के माध्यम से होता हैं (सारी चयन प्रक्रिया मेरे पूर्व लेख में उपलब्ध हैं) डिविजन की आवश्यकता > RRB को अनुदेश > रिक्तियाँ प्रकाशित करना > अभ्यार्थीयों द्वारा आवेदन > परीक्षा > मनोवैग्यानिक परीक्षण > प्रमाण पत्रों डब्ल्यू अभ्यार्थी की जांच > अन्तरिम चयन > डिविजन को सौपना > चिकित्सकिय जांच > बाँड भरना > ट्रेनिंग > स्टेशन पे पदस्थापना. [ बाँड :- आपको कोर्ट से एक बाँड पेपर बनवाकर देना होगा की "आप 5 साल तक लगातार कार्य करेंगे और नौकरी छोड़ कर नही भागेंगे. > ये बहुत आसान कार्य हैं. > कोर्ट में नोटरी से बनवाना होगा. > 200/- तक व्यय होगा. > वकील सारा कार्य करवा देगा. > 2 गवाहों की आवश्यकता होगी. > ओरिजनल प्रति रेलवे को सौपनी होगी.] #ट्रेनिंग कैसे होती हैं ? > आप रेलवे के किसी भी पद पर कार्य करें. उससे पहले समुचित ट्रेनिंग होती हैं > ट्रेनिंग रेलवे के जोनल रेलवे ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में दी जाती हैं. > ट्रेनिंग के बाद परीक्षा ली जाती हैं . > पास होने के बाद आपके पद से संबंधित सर्टिफिकेट प्रदान की जाती हैं . > फ़ेल/अनुतीर्ण होने पर फ़िर से परीक्षा देना होगा. फिर से फ़ेल होने पर नौकरी से बाहर जाईये. > वर्तमान में देश के विभिन्न जोनों में SM की ट्रेनिंग 100 -120 दिन तक होती हैं. > ट्रेनिंग के तहत SM के आपरेटिन्ग के कार्य के थ्योरी क्लासेस, प्रैक्टिकल क्लासेस और स्टेशन पे भेजकर भी ट्रेनिंग दी जाती हैं. > ट्रेनिंग के दौरान आपको एक मानदेय राशि /स्टाइपन (अभी लगभग 27,000/- प्रतिमाह) दिया जाता हैं. वेतन और अन्य सुविधायें :- ==================== > अभी SM का बेसिक 4200 GP (6ठा वेतनमान के अनुसार) या 35,400 (7वां वेतनमान के अनुसार) हैं. > इसमे महँगाई भत्ता, रात्रिकालीन ड्यूटी भत्ता, आवास भत्ता इत्यादि जोड़कर दिया जाता हैं . > वर्तमान में आपको पहला वेतन 38,000/- के आस पास मिलेगा. > आप चाहे तो रहने के लिये आवास/क्वार्टर मिलेगा.(क्वार्टर लेने पर आवास भत्ता नही मिलेगा) > आपको आपके पत्नी, बच्चों, विधवा माँ, दिव्याँग/आश्रित/अविवाहित भाई-बहन के लिये सलाना एक पास(अप एंड डाऊन दोनों) और 4 पी.टी.ओ मिलेंगे. (पास में 100% मुफ़्त यात्रा, पी.टी.ओ में यात्रा का 30% भाड़ा आप देंगे -70% रेलवे देगा.) > 5 साल की लगातार नौकरी के बाद प्रतिवर्ष 3 पास मिलेगा. #सम्मान :- स्टेशन मास्टर का समाज में आज भी बहुत सम्मान हैं. अगर आपका स्टेशन किसी गाँव में हैं तो आपका सम्मान किसी बैंक के शाखा पदाधिकारी/स्कूल के हेड मास्टर / VRO / सरपंच के समकक्ष ही होता हैं. #प्राथमिक कार्य :- SM का मुख्य कार्य रेलगाड़ी को पिछले स्टेशन से लेकर अगले स्टेशन तक सकुशल पहुँचाना हैं. इसके अतिरिक्त छोटे स्टेशनो पर टिकट विक्रय करना भी हैं. (अन्य कार्यों को विस्तार पूर्वक आगे समझेंगे, जब इनके कठिनाईयों के बारे में पढेन्गे) #समस्यायेँ_और_कठिनाईयाँ:- मानता हुँ भारत के अधिकान्श सरकारी या प्राईवेट नौकरी में वर्क लोड, छुट्टी, सीनियर का दबाव इत्यादि बहुत सी समस्यायें हैं. बहुत से लोग दिन रात मेहनत कर रहें हैं. कुछ आराम भी फरमा रहें हैं . बैंक पीओ, पुलिस, लोको पायलेट, गार्ड इत्यादि के समस्याओं के बारे में सारा समाज जानता हैं. लेकिन स्टेशन मास्टर एक ऐसा उपेक्षित कैटगरी हैं जो दिन-रात मेहनत करते हैं. लेकिन लोग उसे आराम करने वाले अधिकारी के तौर पे ही जानते हैं. > ब्लोक इन्स्ट्रुमेंट,पैनल इत्यादि की सहायता से ट्रेनो की यातायात का प्रत्यक्ष प्रचालन करना, > सारे सिग्नलों को आपरेट करना (और बाहरी दुनिया के लोग समझते हैं की ये काम सिग्नल मेन्टेनर का हैं. जबकि उसका कार्य केवल नियमित समय पर सिग्नलो और संबंधित यन्त्रों का अनुरक्षण/मेन्टेनेंस करना एवं अचानक कुछ खराबी आने पर ठीक करना भर हैं) कुछ मिलाकर अगर स्टेशन मास्टर कार्य करने वाला साफ्टवेयर इंजीनियर हैं तो सिग्नल मेन्टेनर खराबी ठीक करने वाला हार्डवेयर इंजीनियर की भाँति हैं. > बहुत सी डायरी और रेजिस्टर में इंट्रि करना -ना केवल ट्रेन के यातयात बल्कि अन्य बातो के लिये भी 78 अलग अलग रजिस्टर होते हैं. एक भी इंट्रि छूटने या गलत लिखे जाने पर चार्जशीट और पनिसमेंट का भय रहता हैं. > रात में सारे सिग्नल स्टाफ़, गैंग स्टाफ-की मैंन, आरपीएफ इत्यादि ड्यूटी पर भी कुत्ते की तरह सोये मिलेगे, काम करता हैं तो केवल स्टेशन मास्टर , कंट्रौलर, टिकट बेचने वाला कलर्क,गेट कीपर, गार्ड , और लोको पायलट. [ रात के समय में जब आप AC कोच में सोते हुए यात्रा करते हैं और सुबह ट्रेन से उतरकर कहते हैं की की मैं लंबी यात्रा से थक गया और एक दिन आराम करूँगा तभी आप अवश्य सोचिये आपके जैसा एक इंसान रात भर बिना एक मिनट बैठे लगातार 10 घंटे तक पूरे रूम में और कमरे के बाहर बार बार ना केवल दौड़ दौड़ कर काम करता रहता हैं. अगर कोई इंसान एक रात किसी विवाह के बारात में जागता हैं तो अगले 2 दिनो तक दिन भर सोता ही रहता हैं और वही SM लगातार 6 दिनों तक नाइट ड्यूटी करते हैं] SM का वास्त्विक कार्य : दिल दहला देने वाला हैं :- > मान लिजिये A B C D तीन लगातार स्टेशन हैं. और आप स्टेशन C के स्टेशन मास्टर हैं. तो, > जैसे ही स्टेशन A से ट्रेन खुलेगी. स्टेशन B वाला एक मशीन का बटन दबायेगा. जिससे आपके स्टेशन पर एक घंटी बजेगी. > आप तुरंत दौड़कर उस मशीन के पास जायेन्गे और एक बटन दबायेन्गे. जिससे उसके पास एक घंटी बजेगी . > स्टेशन -B :- मेरे पास एक ट्रेन हैं चेन्नई एक्सप्रेस, भेजना चाहता हूँ, अनुमति (लाईन क्लियर) दिजिये आप (स्टेशन -C) :- आप 2 मिनट इन्तजार करें. > आप 2 मिनट में स्टेशन B. और स्टेशन C के बीच के सारे रेलवे फाटक/गेट को बंद करवाते हैं और अन्य अनिवार्य बातों पर भी गौर करते हैं. > अब आप पिछले स्टेशन-B को एक भारी मशीन की घुन्डी घुमाकर लाईन क्लीयर देंगे. > आप लाइन क्लीयर देंगे उसके बाद ही वो सिग्नल को हरा (green light ) कर पायेगा. जिसे देखकर लोको पायलट ट्रेन उस स्टेशन -B को पार कर पायेगा. > 5 - 7 मिनट के बाद ट्रेन उसके स्टेशन से बढकर जैसे ही आगे निकलेगी . आपके स्टेशन में एक मशीन से जोर से आवाज आने लगेगी. > अब आप सेक्शन कंट्रौल को फ़ोन करेंगे की क्या करना हैं ? वो बतायेगा की ट्रेन को थ्रू करना हैं या, किसी अन्य ट्रेन के इन्त्जार में उसे लूप लाइन में रीसिव करके अगले आदेश तक रखना हैं (प्राय : गूड्स ट्रेन या, पैसेंजर ट्रेन को लूप में घुसा दिया जाता हैं और सुपरफास्ट ट्रेन को अन्य लाईन से थ्रू किया जाता हैं ) >थ्रू ट्रेन को SM दिन में अपने रूम से निकलकर झंडा (हरा/लाल) और रात में सिग्नल दिखाता हैं . ऐसा सिग्नल एक्सचेंज नही करने पर अगर कोई(LP या, GG) शिकायत कर दें तो दंड निर्धारित हैं [ जिन लोगों की आँखे दोषपूर्ण हैं या, कलर ब्लाइंड हैं वो लाल और हरा में भेद नही कर पायेन्गे ऐसे में वो कैसे लाल या हरा सिग्नल / झंडा पहचानेंगे. क्या वो ट्रेन में बैठे हजारो यात्रियों के जीवन से खिलवाड़ नही करेंगे ? अगर वो आगे ट्रेन होने पर भी लाल रंग को हरा समझ लाल (वास्तव में हरा) सिग्नल दे दें तो ट्रेन रूकने के बजाय दौडेगी और क्या होगा ? ] हलांकी हमारा सिग्नलिन्ग सिस्टम ऐसी गलती को एलाव नही करता फ़िर भी …………(°_°) मेरा नेत्र दोष वाले भाईयों से हाथ जोड़ कर विनती हैं की आप चालाकी करके SM चुने जाने अन्यायपूर्ण /अनैतिक प्रयास ना करें. सच्चाई को स्वीकारें और देशहित वाले कार्य ही करें. > यही उप्रोक्त प्रक्रिया चलती रहती हैं और ट्रेन कश्मीर से कन्याकुमारी तक पहुँच जाती हैं. [नोट:- बहुत से लोग मेरे पोस्ट को अपने नाम से कट-कापी-पेस्ट करते हैं, और आपलोगों के द्वारा कुछ प्रश्न पूछे जाने पर बेकार उत्तर देके टरका देते हैं. कृप्या वो ऐसा ना करें ] > पर्व में छुटटी नही मिलती, मिलता हैं स्पेशल ट्रेन के रूप में अतिरिक्त वर्क लोड > छुट्टी की इतनी किल्लत हैं की पास -पीटीओ धरे ही रह जाते हैं. और अगर टिकट लिया तो अधिकतर कैन्सिल ही कराना पड़ सकता हैं. > हर ट्रेन को झंडा दिखाना (अगर ना दिखाया और ट्रेन में बैठे किसी अधिकारी ने देख लिया, या किसी कर्मचारी(LP या GG) ने शिकायत कर दी तो सजा मिलनी तय हैं. ये सजा कम से कम साल भर या उससे भी अधिक दिन तक इंक्रीमेन्ट कट के रूप में मिलती हैं अर्थात कम से कम 24 हजार की हानि. -भारत के 7800 रेलवे स्टेशन में से आज भी 5000 से ज्यादा स्टेशन में "स्टेशन मास्टर" को ही टिकट जारी करने का अतिरिक्त कार्य दिया गया हैं. जबकि टिकट लेने वालो की भीड़ बहुत बढ चुकी हैं. लोगो को टिकट देने में बक-झक होना आम बात हैं. इसी बीच अगर ट्रेन आपरेटीन्ग में देर हो जाये या किसी कमर्शियल कार्य में कुछ गलती हो जाये तो स्टेशन मास्टर को ही सज़ा मिलती हैं. आप विश्वास नही करेंगे. ना केवल सिस्टम ओपेन कर टिकट बेचना होता हैं बल्कि उनका पक्का रिकार्ड भी रजिस्टर में तैयार करना होता हैं और अक्कौन्ट औफिस को भी भेजना होता हैं. > बहुत बार तो बिजली /एलेक्ट्रिक की गड़बडी भी खुद ही ठीक करना होता हैं. > रेलवे दुनिया की एक मात्र ऐसी नौकरी हैं जिसमे कई बार दूसरे की गलती की सजा आपको दी जाती हैं. और ऐसी सजा अक्सर SM को मिलती ही रहती हैं. अपनी गलती ना होने पर भी क्षमा याचना करनी पड़ती हैं. > आम जिन्दगी में लोग लोग बहुत बार चाबी भूल जाते हैं , रुमाल भूल जाते हैं, कभी कलम तो कभी मोबाईल भूल जाते हैं. कुछ लोग चश्मा ढूँढते नज़र आते हैं (जबकि खुद सिर पे पहने होते हैं), बहुत बार SM अपने समय पे इंक्रिमेन्ट ना मिलने या कोई भत्ता ना मिलने के कारण ओफ्फिस की और जा जा कर अपनी चप्पले घिसते हैं (वो भी नाइट ड्यूटी के बाद) और पता चलता हैं की ये एक कलर्कीयल मिस्टेक हैं. जिसकी सजा कलर्क को नही हमे मिलती हैं. अपने हक को पाने के लिये भी घुस देना पड़ता हैं. > लेकिन अधिक वर्क लोड के कारण, रूम लोगो के भीड़ भाड़ के कारण, कन्फयूजन के कारण या और भी किसी कारण से जीवन में केवल एक बार अगर कोई स्टेशन मास्टर "रेलवे गेट" को बंद करवाना भूल जाये तो सज़ा मिलनी तय हैं. और अगर कोई दुर्घटना घट जाये तो नौकरी से जाने के अलावा बांकी जिन्दगी जेल में बितानी पड़ती हैं. सीधा धारा -302 ( जानबूझकर की गयी हत्या ) के तहत मामला दर्ज होता हैं. > हमारे पास रेलवे के 16 विभाग से जुडे अधिकार नाम मात्र होते हैं और जिम्मेदारी (कर्तव्य) असिमित होते हैं. किसी विभाग की गलती का खामियाजा उसके साथ साथ आनड्यूटी SM को भी मिलता हैं. जैसे सब्जी कुछ भी पके, नमक तो बर्बाद होगा ही. इसिलिये हर स्टेशन मास्टर को हरफनमौला बनना पड़ता हैं . स्टेशन मास्टर बनना बच्चो का खेल नही हैं. एक आग का दरिया हैं. जिसे तैर के पार करना हैं. " वास्तव में स्टेशन मास्टर भारतीय रेलवे का वो सच्चा सिपाही हैं जो फ्रंट पे जाके लड़ता हैं. और हर वार को सीने पे झेलता हैं . अगर आप ट्रेन में आराम से सो रहें हैं , ताश खेल रहें हैं, लैपटाप पे फ़िल्म देख रहें हैं, नौकरी ज्वाईन करने जा रहें हैं , पर्व में परिवार से मिलने जा रहें हैं , तो हमेशा याद रखें की जाने कितने SM, गार्ड, लोको पायलट, गेटमैन इत्यादि कितनी तकलीफ़ और कठिनाई में ड्यूटी कर रहें हैं. " भारतीय रेलवे न डीजल से चलती हैं, ना इलेक्ट्रिक से चलती हैं , ये तो ओपेन लाइन स्टाफ के खून और पसीनों से चलती हैं ~~~~~*{ शुभ -कामनायें }*~~~~~