They had to conduct a study to confirm what we intuitively know !
Happy Rakshabandhan to all.... Sare bhai behan salamat raho yahi dua dil se... 😝😝😛😛😜😜😉😉😂😂😂😂😘😎😎😄😄😅😅😆😆🙌🙌🙌🙌😇😇😇😇😇😇😇💁💁💃👼👭👭👬👫👫👌👌🙌👌👐🙌🙌
Why don't t police be given independent body status ..u cannot arrest politicians inspite of victim statement.. WTF... Police said no evidence of attempt to kidnap.. Cmon just say we r afraid of them.. Next time they will wait Till kidnap, rapE. , murder n will say victim is dead and we don't know who 😡did that #(
@s.nandan @scrapper @mysteriousankita @apurva. @anmolsinha4u @tiwariashu46 @kulluoo789 @shikhakalshain @hardikhet.dabhi @Miss_invincible @anonymous.96 @Ethan_hunt.1 @priti_priti @asingh0690 @Shagun2307 @Aameenah @Kilwiish & Etc. 😝 kaha ho sab...?? 😶😯😕🤔🤔🤔😳😵😰 RTS is missing u all...😅😄 Aa jao chalo...😂🙋👊🐒🐒😊😊😍😍😎😎🤗😡😡😒😓😕😔🙃😛😌😯😶🙄🙄😏😏😠😠😭😭😬😨😨😇😇👩👩👧👨👦👸🙊🙊🙉🙈👰💁👼🙋🙋🙋🙋🙋💃🚶🚶🚶💏👨❤💋👨👭🙏👌👌💅💅🙌😂😂😂
तेरी मर्जी से ढल जाऊं, हर बार ये मुमकिन नही मेरा भी वजूद है, मै कोई आइना नही
आज जल्दी लौट आया हूँ दफ़्तर से, घर बड़ा खुश है मुझे देखकर।
Hence don't always be there for her.😔
Latest Earworm:
"Hum toh jaate hai duaaon ki tarah...tum bhi kho jaao sadaaon ki tarah..." 😍
Let's see which gets extinct first...Tigers, or hair on my head.🤔
A she legend said whenever a girl tag u tag u in her post either in end or beginning it means u r very close to her heart. 😆😍
We r Indians.. We don't belong to State🇦🇩 city, 🇦🇽village.. Then y make sarcastics cmnts on one's ethnicity .. Feel proud to learn sth NEw..unity iS our strength..united we stand Divided we fall🇪🇬jai hind
नींबू के ऊपर "अमित शाह "लिखकर पड़ोसी के घर रखने से मकान पर कब्ज़ा होता है.. 😂😂
Getting rejection from all recruitment exams.. feeling miserable...
राईज़ टू स्माइल के मंच पर एक संवेदनात्मक पोस्ट
आशा है आप लोग गालियां नहीं देंगे
(अग्रेषित लेख)
⭕आशा साहनी की मौत संवेदनाओ की मौत है
➖➖➖➖➖➖➖आशा सहनी की मौत की रूह कांपने वाली खबर अधिकतर ने आज नहीं पढ़ी होगी क्योंकि उस खबर में मसाला नहीं था। खबर नहीं पढ़ने या पढ़कर इग्नोर करने की एक और वजह थी- उसमें हम सब आईने में अपनी तस्वीर देखने का साहस न उठा पाते।
खैर,बात पहले आशा सहनी की।
80 साल की आशा सहनी मुंबई के पॉश इलाके में 10 वी मंजिल पर एक अपार्टमेंट में अकेले रहती थी। उसके पति की मौत चार साल पहले हो गयी। अकेले क्यों रहती थी? क्योंकि उसका अकेला बेटा अमेरिका में डॉलर कमाता था। बिजी था। उसके लिए आशा सहनी डेथ लाइन में खड़ी एक बोझ ही थी। उसके लाइफ फारमेट में आशा सहनी फिट नहीं बैठती थी।
ऐसा कहने के पीछे मजबूत आधार है। बेटे ने अंतिम बार 23 अप्रैल 2016 को अपनी मां को फोन किया था। ह्वाटसअपर पर बात भी हुई थी। मां ने कहा-अब अकेले घर में नहीं रह पाती हूं। अमेरिका बुला लो। अगर वहीं नहीं ले जा सकते हो तो ओल्ड एज ही होम ही भेज दो अकेले नहीं रह पाती हूं।
बेटे ने कहा-बहुत जल्द वह आ रहा है।
कुल मिलकार डॉलर कमाते बेटे के लिए अपनी मां से बस इतना सा लगाव था कि उसके मरने के बाद अंधेरी का महंगा अपार्टमेंट उसे मिले। जाहिर है इसके लिए बीच-बीच में मतलब कुछ महीनों पर आशा सहनी की खैरियत ले लिया करता था जो उसकी मजबूरी थी। अंदर की इच्छा नहीं। हर महीने कुछ डॉलर को रुपये में चेंज कराकर जरूर बीच-बीच में भेज दिया करता था।
चूंकि उसे इस साल अगस्त में आना था, तो उसने 23 अप्रैल 2016 के बाद मां को फोन करने की जरूरत नहीं समझी। वह 6 अगस्त को मुंबई आया। कोई टूर टाइम प्रोग्राम था। बेटे ने अपना फर्ज निभाते हुए, आशा सहनी पर उपकार करते हुए उनसे मिलने का वक्त निकालने का प्रोग्राम बनाया। उनसे मिलने अंधेरी के अपार्टमेंट गये। बेल बजायी। कोई रिस्पांस नहीं... लगा, बूढी मां सो गयी होगी। एक घंटे तक जब कोई मूवमेंट नहीं हुई तो लोगों को बुलाया। पता चलने पर पुलिस भी आ गयी। गेट खुला तो सभी हैरान रहे। आशा सहनी की जगह उसकी कंकाल पड़ी थी। बेड के नीचे। शरीर तो गल ही चुका था, कंकाल भी पुराना हो चला था। जांच में यह बात सामने आ रही है कि आशा सहनी की मौत कम से कम 8-10 महीने पहले हो गयी होगी। यह अंदाजा लगा कि खुद को घसीटते हुए गेट खोलने की कोशिश की होगी लेकिन बूढ़ा शरीर ऐसा नहीं कर सका। लाश की दुर्गंध इसलिए नहीं फैली कि दसवें तल्ले पर उनका अपना दो फ्लैट था। बंद फ्लैट से बाहर गंध नहीं आ सकी।
बेटे ने अंतिम बार अप्रैल 2016 मे बात होने की बात ऐसे की मानो वह अपनी मां से कितना रेगुलर टच में था। जाहिर है आशा सहनी ने अपने अपार्टमेंट में या दूसरे रिश्तेदार से संपर्क इसलिए काट दिया होगा कि जब उसके बेटे के लिए ही वह बोझ थी तो बाकी क्यों उनकी परवाह करेंगे।
वह मर गयी। उसे अंतिम यात्रा भी नसीब नहीं हुई।
आशा सहनी की कहानी से डरये। जो अाज आशा सहनी के बेटों की भूमिका में है वह भी डरें,क्योंकि कल वह आशा सहनी बनेंगे। और अगर आप किसी आशा सहनी को जानते हैं तो उन्हें बचा लें।
पिछले दिनों इकोनॉमिस्ट ने एक कवर स्टेारी की थी। उसके अनुसार इस सदी की सबसे बड़ी बीमारी और सबसे बड़ा कष्ट सामने आ रहा है-मृ़त्यू का इंतजार। उसके आंकड़ा देकर बताया कि किस तरह यूरोप,अमेरिका जैसे देशा में मृत्यू का इंतजार सबसे बड़े ट्रामा बन रहा है। मेडिकल-इलाज और दूसरे साधन से इंसान की उम्र बढ़ी लेकिन अकेले लड़ने की क्षमता उतनी ही रही। मृत्यू का इंतजार आशा सहनी जैसे लोगों के लिए सबसे बड़ा कष्ट है। लेकिन मृत्यू और जीवन सबसे बड़ा लेवल करने वाला फैक्टर है। यह एक साइकिल है। आशा सहनी एक नियति है। कीमत है विकास की। कीमत है अपग्रेडेशन की। कीमत है उस एरोगेंस की जब कई लोगों को लगता है कि वक्त उनके लिए ठहर कर रहेगा।
Ehtiyaatan bujha sa rehta hoon, jalta rehta to raakh hojata ❤️
Bhatakta hu,Sheher me anjaana sa.. Teri talaash me.
When u truly care for someone, their mistakes never change ur feelings😄😄😍😍😘😘