फितरत, सोच और हालात में फर्क है… वरना ,इन्सान कैसा भी हो दिल का बुरा नही होता..
😂😂
चला गया आज कोई अपना हमें अकेला छोड़ कर, और देता चला गया कुछ यादें हम जैसों के लिये; और कुछ गम उसके अपनों के लिये।।।
पिताजी कहते थे...
यदि हम सुखी होना चाहें तो यह सम्भव है लेकिन......... यदि हम दूसरों की अपेक्षा अधिक सुखी होना चाहें तो यह असम्भव है॥
#अपने पिता के आदर्शो का सम्मान कीजिए ..यहीं उनके लिये सच्चा उपहार है.....
Happy Father's Day!
" Beta beta hota hai , baap baap hota hai "
<3
😁😁😋😋 एक लड़की को एक लड़का फोन करके रोज परेशान कर रहा था..! . . तँग आकर उस लड़की ने उस सिम कार्ड को निकाल तोड़ कर फेंक दिया और नया सिम खरीद कर डाल ली..! . . फिर उसने लड़के को फोन करके कहा - हमने वो सिम ही तोड़ कर फेंक दी है, . दम है तो अब फोन करके दिखा..! . Ufffffffff लड़कियाँ कितनी समझदार होती हैं...
Yes yes yes😂😂
Hmm... Sometimes.... 😐
😁
There is no regrets in life..Just lessons..
न गुजरना तुम मस्जिद के आगे से ईद के दिन, कही लोग तुम्हे चाँद समझ के रोजा न तोड़ दे।...
होके खफा तुमसे
खुदा, कही तुम जैसा चाँद बनाना न छोड़ दे।
'तूफ़ान' भी आना ज़रूरी है 'ज़िन्दगी' में ...
तब जाकर पता चलता है - 'कौन' हाथ 'छुड़ाकर' भागता है,
और
'कौन' हाथ 'पकड़कर' भागता है...!!
Hard work work puts you in the place where luck can find you.
...
हेलो, बेटा!जी माँ, प्रणाम। कैसी हो ?खुश रहो, हम ठीक हैं। तुम कैसे हो ?मैं कुछ बोल पाता इस से पहले दूसरी तरफ से कानों में एकआवाज़ पड़ी, 'पूछिये, कभी मेरी भी याद आती है की नहींउसे?' ये आवाज़ मेरे पापा की थी।मैं निःशब्द हो गया, तब मम्मी ने जल्दी से मोर्चासँभालते हुए कहा 'लो, पापा से बात कर लो! तुम्हे बड़ायाद करते हैं।खैर तब तो बात हो गयी। मेरे सुपरहीरो पापा, जो कभीमेरे लिये "सबसे स्ट्रॉन्गेस्ट" हुआ करते थे, आज इतना बेबसहो गये है कि अपने बेटे से बात करने के लिए पूछते है कीकभी उनकी याद आती भी है या नहीं !बचपन से लेकर आजतक जब भी 'पापा' शब्द जेहन मेंआया है कभी भी कमज़ोर या बेबस का ख्याल नहींआया। वो पापा जो आजतक मेरी हर जरूरत पूरी करते रहेउन्हें भी कभी मेरी जरुरत हो सकती है ये ख्याल कभीआया ही नहीं। बचपन जब कोई पूछता था बड़े होकर क्याबनोगे? तो सीना तान के कहते थे कि पापा की तरह बनेंगे।तब पापा से बड़ा और पापा से अच्छा कोई था ही नहीं।देखा जाय तो हमारे इस पितृप्रधान समाज में बाप कीजगह सबसे अलग-थलग होती है। एक माँ अपने बच्चे केलिए कितना त्याग करती है इसकी मिसाल सारी दुनियादेती है लेकिन बाप के बारे में कोई कुछ नहीं कहता क्योंकियह बाप का कर्त्तव्य हैं। बेचारा बाप अपनी सारी उमरबस परिवार की जरूरतें पूरी करने में निकाल देता है। बड़ेहोने पे हमें कुछ याद रहता है तो बाप का वो क्रुद्ध चेहराजो बचपन में किसी छोटी गलती पर डाँट खाते हुए देखाथा। मज़े की बात ये होती है कि उन गलतियों के बारे मेंबाप को पता भी माँ से ही चलता है। बाप तो दिन भर घरसे बाहर होता है, और अगर बच्चा माँ से भी डर गया तोकहाँ जायेगा ? शायद यही सोच कर माँ हमेशा ब्रम्हा,विष्णु तो बाप महेश का किरदार अदा करते हैं।समाज हम लड़को को हमेशा 'माँ का लाडला' ही कहताहैं। जब हम छोटे होते हैं तब बाप से बस इतना ही मतलबहोता है की नयी किताबें ला दो, नए खिलोने ला दो। औरजब ये सब मिल जाते हैं तो हम फिर दौड़ कर माँ की हीगोद में जाते हैं। बाप बेचारा उसी खुशी को देख कर संतुष्टहो जाता है। जैसे जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, जरूरतें भीबढ़ती हैं और उन्हें पूरा बाप ही करता है। और जब हम घरछोड़कर जाते हैं तब भी पापा की याद बस तभी आती हैजब पैसे चाहिए होते है। जब भी घर पे फ़ोन करते है तो बसमाँ से बात करने को, कभी पापा को फ़ोन कर भी लियातो यही पूछते है की माँ कहाँ है ?हम अपनी जिंदगी बनाने में इतने व्यस्त हो जाते हैं किकभी बाप के सफ़ेद होते बालों का ख्याल आता ही नहीं।फिर भी बाप अपने बच्चे को आगे बढ़ते देख खुश रहता है।अपनी सारी उम्र बच्चे के लिए लगाने वाला बाप तब भीकुछ नहीं मांगता। और जब उसके बच्चे "सेटल" हो जाते हैंतो बाप को बस इतनी उम्मीद रहती है की अब तो बेटाकभी फ़ोन करके पूछेगा कि पापा कैसे हैं आप ??और तब जब बाप के सब्र का बांध टूट गया होगा तबबरबस ही आवाज़ निकल पड़ी होगी- 'पूछिये, कभी मेरीभी याद आती है की नहीं उसे......
Bhagwan ki maya bhi kuch ajib hai-- क्या बिती होगी उस चौदह साल के बच्चे पर जिसने आज अपने पिता को मुखाग्नि दी; बच्चे ने तो ''Fathers day'' गिफ्ट दे दिया पर पिता शुक्रिया अदा करना भुल गएँ।।