bc aj bhi nahi aaya ...ibps me setting chal rahi he aisa lag raha he..
Next 9 minutes tak marks aane ki announcement ho sakti hai
meanwhile canara bank ne apni vacancy wapas leli hai.... #source:- kisi k jiju
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Aayega....darega to nahi
1 pm to 2pm---Yahi sabse crucial hai.
Apna Apna thaam ke baitho
Dil !!
itna shant ibps aajkal ki hrr roz hi result lgta hai #deja vu 😁
Kat chukaa he😖
No black money recovered. Ganga still unclean. Vadra still free. 2G scam. I think I voted just to link my aadhar card to my sim card and bank account. 😐😑😶
If not today then it will be on 5th march,,, #Saavadikuragga
Whether all the interview process all over india completed on 5th feb or any resheduled happened at any centre,,,,
Called ibps many times but today they picked phone said interview process still going so as soon as it will be over marks will be displayed. Is it true?
Interview k marks bhi aate hai kya mains k saath?
- yes
- no only mains marks
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2016 me saamne aaya tha, around $3.2 Billion Dollars ka. https://www.indiatoday.in/india/story/indo-iran-uco-bank-scam-cbi-registers-pe-against-unknown-rbi-officials-uco-bank-ex-official-324849-2016-05-21
-_-
- Aaj ayega
- Bhad me jaaye IBPS
- Aaj nai ayega
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Arijit ke songs isse jyada jaldi aa jaate hai 😞
Dekho Main aa gya..koi jaanta h mujhe idhr bc 😈😈
Aaj bhi kat gaya aur ab kal parso to bina kisi uppid ke katega
Yeh Kya padha Maine obc 1300 PO lega, kisi ke jiju ne btaya. Mazza aa gya bc..kasam se, Ab kisi ki saali bi Indian, syndicate mein le aao vacancies, please..main Pakistan chodd dunga..bc aaj bi champions trophy ke patakhe phod rahe Hain saale
Every day around 2 pm... Let's forget about the marks and start preparing for next exams from tomorrow. Next day from morning, scrolling through pg for cut off prediction and whether the mark will come today ? And the cycle goes on 😒😒😒
पागलपन की हद तक बैंकरों के भेजे गए हज़ारों मेसेज पढ़े जा रहा हूं। गर्दन में दर्द हो गया है। ये मेसेज मुझे शोषण, बेईमानी और यातना की ऐसी दुनिया में लेकर गए हैं जहां हर चेहरे से ख़ून के आंसू निकलते दिख रहे हैं। नोटबंदी ने बैंकरों को भी लूटा है। हमारा विपक्ष अपनी अनैतिकताओं के बोझ ने दबा होता और चुनावी हार-जीत से अलग होकर नोटबंदी जैसे राष्ट्रीय अनैतिक अपराध पर सवाल करता तो इसकी क्रूर सच्चाइयां हमारे सामने होतीं। विपक्ष ने किया भी मगर जनता ने साथ नहीं दिया और बैंकर ख़ामोश रहे। अब जो पढ़ रहा हूं उसका कुछ सार पेश कर रहा हूं। नोटबंदी के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारियों को अपनी जेब से पैसे भरने पड़े हैं। नोट गिनने की मशीन नहीं थी। एक ही कैशियर था। लिहाज़ा जो भी स्टाफ था नोट गिनने लगा। इस क्रम में दो ग़लतियां हुईं। बहुत से जाली नोट आसानी से बदल दिए गए। दूसरी चूक यह हुई कि कई बैंकरों का हिसाब जब कम निकला तो उन्हें बकाया पैसा अपनी जेब से भरना पड़ा। रात रात भर काम करने के लिए बैंकरों को कुछ नहीं मिला. एक बैंकर ने लिखा है कि नोटबंदी के दौरान हज़ार कस्टमर को डील करना पड़ता था। करोड़ों में कैश जमा करने पड़े। एक बार उसके हिसाब से 50,000 रुपए कम निकले। बैंक में उसकी किसी ने मदद नहीं की। अपने घर वालों से पैसे लेकर भरने पड़े। जबकि उस व्यक्ति की सैलरी मात्र 21000 रुपये थी। एक कैशियर से 38,000 वसूली के आदेश आए तो टेलर ने लोड बांट लिया और अपनी जेब से 19000 रुपये दिए। एक महिला बैंकर ने बताया है कि नोटबंदी के वक्त कैश काउंटर पर वह अकेली थी। इतनी भीड़ थी कि दबाव में नोट बदलने पड़े थे। 1000 के 28 नोट ख़राब निकले। बैंक ने उस महिला से 28000 रुपये वसूल लिए। इस तरह नोटबंदी जैसे राष्ट्रीय नैतिक अपराध की सज़ा बैंकरों ने भी भुगती। एक बैंकर ने बताया कि जितने भी जाली नोट पकड़े गए उसकी भरपाई बैंकरों की जेब से हुई है। अगर यह सही है तो बैंकरों के साथ हुई इस लूट से मैं काफी व्यथित हूं। भारतीय रिज़र्व बैंक ने बताया था कि नोटबंदी के दौरान 42 करोड़ जाली नोट ज़ब्त हुए थे। तो क्या ये 42 करोड़ कैशियर और टेलर की जेब से निकाले गए? बैंकर ने तो यह भी बताया कि जब शाखा से पैसा अपने बैंक की करेंसी चेस्ट में पहुंचा तो वहां जो जाली नोट पकड़े गए उसकी भी वसूली कैशियर से हुई। जबकि नोटबंदी के वक्त बैंक का पूरा स्टाफ नोट गिन रहा था। हिसाब में ग़लती होने पर या जाली नोट आ जाने पर उसकी वसूली कैशियर पर लाद दी गई। मैं लगातार बैंकों पर फेसबुक पेज@RavishKaPage पर लिख रहा हूं। मगर उस दौरान के अनुभवों को किसी ने नहीं बताया। आख़िर इस चुप्पी को बैंकरों और उनके आस पास का समाज कैसे पचा सका? क्या हमने अपनी नागरिकता सरेंडर कर दी है, बोलने के अधिकार सरेंडर कर दिए हैं? क्या उन्हें नहीं समझ आया कि ये लूट है? नोटबंदी सरकार की ग़लती थी। रातों रात बिना तैयारी के सब पर थोप दी गई। उस पर बैंकरों ने जान लगाकर सेवा की लेकिन मिला क्या? उस दौरान हुई चूक की वसूली क्लर्क और कैशियर से हो रही है? अभी भी बैंकरों में ज़रा भी ईमान बचा है तो नोटबंदी के दौरान हुई इस लूट को समाज को बता दें। मीडिया से बात नहीं कर सकते, इंडिया से तो बात कर सकते हैं। बस में बताएं, रेल में बताएं, पान और चाय की दुकान पर सबको बताएं, शादी में रिश्तेदारों को बताएं, घरों में बताएं कि क्या बीती है उन पर। उनके साथ ग़लत हुआ है। 28 साल की एक महिला बैंकर ने लिखा है कि नोटबंदी के दौरान उसने रात दो बजे तक बैंक में रहकर काम किया। जबकि उसका बच्चा 7-8 महीने का था। कई दिनों तक बच्चे की शकल नहीं देखी। महिला बैंकर अपने छह छह महीने के बच्चों को छोड़ देर रात कर बैंकों में काम कर रही हैं। बैंक की शाखा में छोटे बच्चे को रखने की छोड़िए शौचालय की कोई सुविधा नहीं है। बैंकर अपने बूढ़े मां-बाप की सेवा नहीं कर पा रहे हैं। क्या हम एक नागरिक होने के साथ अपने नागरिकों के साथ हुए इस अत्याचार की दास्तान जानते हैं? बहुत से बैंकरों को लगा कि वे देश सेवा कर रहे हैं। इस आर्थिक अपराध को वे किसी राष्ट्रवादी आंदोलन की तरह देखने लगे। उन्हें लगा कि इस आंदोलन में रात रात जागने के बाद सरकार इनाम देगी लेकिन अब तो सैलरी भी नहीं बढ़ रही है। बैंकरों की सैलरी बढ़ने की जगह घटने लगी है। अब तो बैंकर ही रोज़ अपनी आंखों से देख रहे हैं कि किस तरह भ्रष्टाचार कायम है। वही बता दें कि क्या भ्रष्टाचार ख़त्म हो गया है? बैंकर हर तरह से सताए जा रहे हैं। आख़िर वे किस दिन के लिए इतनी यातना सह रहे हैं। एक महिला बैंकर ने लिखा है कि एक छुट्टी लेने के लिए पहले उसे बीमा की पालिसी बेचने के लिए कहा जाता है। बीमा बेचने का दबाव इतना है कि महिला बैंकर ने बताया कि उसने ख़ुद भी एक साल के भीतर दो दो बीमा पालिसी ली है ताकि टारगेट पूरा हो सके। यह सब किस हिन्दुस्तान के लिए बर्दाश्त किया जा रहा है। क्या हम एक बुज़दिल इंडिया बनाना चाहते हैं? रोएगा इंडिया, सहेगा इंडिया, डरेगा इंडिया बढ़ेगा इंडिया, ये हमारा कब से नारा हो गया है। क्या इस दिन के लिए हमारे स्वतंत्रता सेनानी हमें आज़ाद भारत सौंप कर गए थे? क्या यही है हमारा सुपर पावर इंडिया, विश्व गुरु भारत ? किसी भी बैंक के चेयरमैन ने अपने बैंकरों के साथ हो रहे इस अन्याय को लेकर आवाज़ क्यों नहीं उठाई? एक तो ये चेयरमैन घटिया शूट पहनते हैं, न फीटिंग अच्छी होती है न रंग अच्छा होता है। टाई भी अच्छी नहीं होती मगर शेखी ऐसी झाड़ते हैं जैसे कहीं के नवाब उतरे हों। ये किस बात के चेयरमैन हैं, जो अपने कर्मचारियों के साथ हो रहे इस भयंकर शोषण के ख़िलाफ़ आवाज़ नहीं उठाते हैं। क्या ये कुर्सी के पीछे सफेद तौलिया रखने के लिए और हुज़ूर के सामने सर झुकाने के लिए चेयरमैन बनते हैं? Ravish kumar