Score kb aa rha hai po mains ka
- kal
- after kal
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Score kb aa rha hai po mains ka
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The PNB-Fraud in Layman's language.
http://www.opindia.com/2018/02/nirav-modi-financial-fraud-all-you-need-to-know/
i missed interview by 0.75 in SO Marketing mains obc category
Padmawati ke jagah agar priya prakash hoti to Sala na pata Kitna Allauddin khilji ladai karke mar jata 😂... Waise sach me iski adayen dekh ke sala dil khush ho jata hai 😁
@AbhiABhiD L-and ka topa khud kabhi ek kaam ka post karega nahi aur dusre jo hlp kare unse khojli hoti hai...... tere jaiso ko mere tope ki saalami... thooko likes
What is happening here I could not understand ...
what u want to say about Nirav Modi
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bhai logo Nirav, mallaya jaise log IBPS ko bnd krwa kr rhenge PNB ki to ijjat hi loot li 14 feb ko ha ha
Bc ye bank wale hme bina inform kiye hr mhine mini. bal nhi rkhne k 30-50 Rupye cut kr lete hai 1 rupye ka loan bina collateral k nhi milta nirav modi jaiso ko 11500 CR. rupye kese mil jate hai ab sunil mehta ki skl dekhi Press conf. m rone jaisi ho rhi thi fat k hath mai gyi hindi bhi shi se nhi boli ja rhi thi esa kam hi kyu krte ho jo rona pde Bc had hoti hai chu---yape ki
Expecting your marks in mains
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Thank you all for the lovely birthday wishes, you people are great. 😄 And special thanks to @losT_Hopes for the post 🙈 @hash_tag for being my "brofriend" 🤗 and to the monkey of this thread @HeatTransfer 🐒--> tumko mera special sorry aur thank you. Sorry isliye qki inhone kal raat me hi birthday post daali thi lekin humne delete kara di thi. 😂 and last but not the least, thank you to 🐳/☃️ for everything 😄 qki tum na hote toh mera pata nhi kya hota.😝 Gyaan aur long post likhna ata nhi toh best wishes to each one of you. Stay happy and happy! :)
*आदतें औकात का पता बता देती हैं...* एक राजा के दरबार मे एक अजनबी इंसान नौकरी मांगने के लिए आया। उससे उसकी क़ाबलियत पूछी गई, तो वो बोला, "मैं आदमी हो चाहे जानवर, शक्ल देख कर उसके बारे में बता सकता हूँ। राजा ने उसे अपने खास "घोड़ों के अस्तबल का इंचार्ज" बना दिया। चंद दिनों बाद राजा ने उससे अपने सब से महंगे और मनपसन्द घोड़े के बारे में पूछा, उसने कहा, "नस्ली नही हैं ।" राजा को हैरानी हुई, उसने जंगल से घोड़े वाले को बुला कर पूछा.. उसने बताया, घोड़ा नस्ली तो हैं, पर इसकी पैदायश पर इसकी मां मर गई थी, ये एक गाय का दूध पी कर उसके साथ पला है। राजा ने अपने नौकर को बुलाया और पूछा तुम को कैसे पता चला के घोड़ा नस्ली नहीं हैं ?" "उसने कहा "जब ये घास खाता है तो गायों की तरह सर नीचे करके, जबकि नस्ली घोड़ा घास मुह में लेकर सर उठा लेता हैं।😊 राजा उसकी काबलियत से बहुत खुश हुआ, उसने नौकर के घर अनाज ,घी, मुर्गे, और अंडे बतौर इनाम भिजवा दिए। और उसे रानी के महल में तैनात कर दिया। चंद दिनो बाद , राजा ने उस से रानी के बारे में राय मांगी, उसने कहा, "तौर तरीके तो रानी जैसे हैं लेकिन पैदाइशी नहीं हैं।” राजा के पैरों तले जमीन निकल गई, उसने अपनी सास को बुलाया, मामला उसको बताया, सास ने कहा "हक़ीक़त ये हैं, कि आपके पिताजी ने मेरे पति से हमारी बेटी की पैदाइश पर ही रिश्ता मांग लिया था, लेकिन हमारी बेटी 6 माह में ही मर गई थी, लिहाज़ा हम ने आपके रजवाड़े से करीबी रखने के लिए किसी और की बच्ची को अपनी बेटी बना लिया।" राजा ने फिर अपने नौकर से पूछा "तुम को कैसे पता चला ?" ""उसने कहा, " रानी साहिबा का नौकरो के साथ सुलूक गंवारों से भी बुरा हैं । एक खानदानी इंसान का दूसरों से व्यवहार करने का एक तरीका होता हैं, जो रानी साहिबा में बिल्कुल नही। राजा फिर उसकी पारखी नज़रों से खुश हुआ और बहुत से अनाज , भेड़ बकरियां बतौर इनाम दीं साथ ही उसे अपने दरबार मे तैनात कर दिया। कुछ वक्त गुज़रा, राजा ने फिर नौकर को बुलाया,और अपने बारे में पूछा। नौकर ने कहा "जान की सलामती हो तो कहूँ।” राजा ने वादा किया। उसने कहा, "न तो आप राजा के बेटे हो और न ही आपका चलन राजाओं वाला है।" राजा को बहुत गुस्सा आया, मगर जान की सलामती का वचन दे चुका था, राजा सीधा अपनी मां के महल पहुंचा। मां ने कहा, "ये सच है, तुम एक चरवाहे के बेटे हो, हमारी औलाद नहीं थी तो तुम्हे गोद लेकर हम ने पाला।” राजा ने नौकर को बुलाया और पूछा , बता, "तुझे कैसे पता चला ?” उसने कहा " जब राजा किसी को "इनाम दिया करते हैं, तो हीरे मोती और जवाहरात की शक्ल में देते हैं....लेकिन आप भेड़, बकरियां, खाने पीने की चीजें दिया करते हैं...ये रवैया किसी राजाओं का नही, किसी चरवाहे के बेटे का ही हो सकता है।" किसी इंसान के पास कितनी धन दौलत, सुख समृद्धि, रुतबा, इल्म, बाहुबल हैं ये सब बाहरी दिखावा हैं । इंसान की असलियत की पहचानउसके व्यवहार और उसकी नियत से होती हैं... इसीलिए “चाय” बेचने वाले की सोच, “पकौड़े” बेचने से ऊपर नही उठ सकती। हैसियत बदल जाती है,पर सोच नही।
Hi